Friday, November 16, 2012

Muharramul haram

अस-सलामुअल्य्कुम वरह्मतुल्लाही वाबर्कातुह,
मेरे पियारे जाने अनजाने  दोस्तों सब खेरियत होगे,इस्लामिक मुसलमानों के नए साल की भी
सुरुआत २ दिन से हो चुकी है ये बड़े पियारे दिनी और तारीखी ऐयाम और दिन चल रहे है
इतिहास और तारीख गवाह है हमारे अस्लाफो ने  दिन को इस्लाम को जिंदा रखने के लिए
अपने आप की जान की बी क़ुरबानी दी कर्बला में जोहर की नमाज़ का वक़्त हो रहा था
अल्लाह के पियारो ने दुश्मनों से कहा कुछ वक़्त के लिए लड़ाई जंग बंद रखे
 हमें नमाज़ पद लेने दो मगर दुश्मनआ  इस्लाम ने उस वक़्त बी मजाक उड़ाई थी हशन हुसैन के साथ बावन साथी थे छाब्बिश चब्बिश की २ टीम बनायीं थी पहेली छाब्बिश ने नमाज़ पड़ी और छाब्बिश निगरानी रखकर लड़ते रहे मेरा कहेने का मंशा ये है की नमाज़ जैसी अहम् इबादते उओं लोगो ने न छोड़ी अपने को सहीद करना पसंद किया मगर अल्लाह के फ़राइज़ को न छोडे.आज का मुस्लमान जो अपने दिन इमांन  का सोडा करता है दुनिया के असबाब रहत सुकून ऐयाशी के लिए और पूरी मुस्लिम कोम और इस्लाम को बदनाम करता है उसे याद रखना छाहिये के हमें एक रोज़ मरना है अल्लाह को और अल्लाह के रसूल को मुह दिखIना है उस वक़्त हम किया मुह दिखाएगे,एक और किस्सा किताबो मई आता है हशन बशरी र. अ. ने राबिया बश्रिया को निकाह के लिए पैगाम भेजा था राबिया ने कहा मेरे कुछ सवालों का जवाब दोंगे तो मई निकाह करुगी १ सवाल जब हस्र मई हिशाब के रोज़ आमल नामा अल्लाह हर इन्शान के हाथमे देगे तो मेरा आमल नामा सीधे हाथ मे दिया जाएगा या उलते हाथ मे हशन र.अ. ने कहा मुझे मालोम नहीं २ सवाल किया राबिया बशरी र.अ. ने की मे जन्नती हु या जहान्नामी  हशन बशरी र.अ. ने कहा मुझे पता नहीं ३ सवाल  मे अल्लाह की महेबुबा हु या अल्लाह की दुश्मन हशन र.अ.ने कहा मुझे पता नही तो रबियाने कहा तो फिर रहेने दो मुझे आखिरत की तयारी  करने दो इतने डरते थे वोह लोग और अज हमारा हाल   ये है  हम गुनाह करके बी फख्र करते है कितनी बुरी बात है,एक और किश्हा बी सुनो पदों  एक सैयदना बेवा औरत एक मालदार के पाश गयी कहा मेरी कुछ इमदाद करो मरी बचिया जवान हो गयी है खाने पिने को कुछ नहीं है  उस मुस्लमान मालदार ने कहा किया साबुत है तू सैयद है बहुत आजिजी की मगर वो न मiनI वो औरत थक हIर के एक मजुशी के पास गयी मजुशी यानी पारसी आगको पुओजने वाला उसने उओस औरत की मदद की अपने यहाँ सहारा दिया रात मे  मुस्लमान मालदार ने ख्वाब देखा जिसमे सबको आप स.व. जन्नत के महेल मे भेज रहे है जाने को कह रहे है  उओस अमुसलमान ने कहा मुझे बी मेरे बंगलेमे जाने दो  हुजुर स.व. ने कहा किया साबुत है तू इमांन वाला है तूने उओस औरत से प्रूफ मांगा था. जब सुबह आंख खुली तो दोड़ता हुवा उस औरत को धुनने गया धुनते धुनते वोह मजूसी के वह मिली उओसने उओस्से कहा भाई ये मुस्लमान तू मजूसी  इसे मेरे हवाले करदे आजाद करदे उओसने न इनकार कर दिया और कहा सुनो जब ये आई तो मैंने इसे पनाह दी इसका तावुन किया उओसी वक़्त मेरे दिल मे बात आई और मेने कलमा पड़कर इस्लाम मे दखिल हो गया आज बी मुस्लमान खुद इस्लाम को समजा नहीं है और दुसरो के साथ दिन का सौदा कर रहा है गैर तो गैर खुद मुस्लमान मुस्लमान के लिए मुह मे आये वोह बकता है  अपने भाई यो को तकलीफ देता है ये बहुत बुरी बात है यक़ीनन अछे बुरे का फैश्ला होना है यहाँ तो भुगतना है और आखिरत का माम्लातो बहुत मुश्किल है अल्लाह हमसब को नेक  हिदायत दे और स्म्जाकर दिन की कदरदानी नसीब करे आमीन (जुम्मा के रोज़ शैख़ मुहम्द हनीफ लुहर्वी के बयान मैसे )           
   

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