विजन
डाक्युमेंट तकरीब के चंद लम्हात याद आ रहे हैं, कलम बंद कर रहा हूँ ताकि
सनद रहे, बात उन दिनों की है जब मैं उर्दू सहारा का मीडिया हेड हुआ करता
था, हालांकि आज भी सभी सहारा उर्दू अशाअतों में ग्रुप एडिटर की जगह प्रिंट
लाइन में मेरा नाम है लेकिन अब सहारा कॉर्पोरेट से वाबस्ता हूँ, अखबार से
कोई ताल्लुक नहीं, इसलिए क़ारी जब...
अखबार के हवाले से बात करते हैं तो मुश्किल होती है, बहरहाल मैं ज़िक्र उन
दिनों का कर रहा था जब सहारा का एडिटर था तो अक्सर फोटो लेने के मौके पर
बीच से हट जाता था ताकि छपते वक्त हर रोज फ़ोटो में मेरी तस्वीर न हो, कल
एक काबिले ज़िक्र वाकेआ सामने आया, प्रोफेसर अख्तरुल वासे मेरे बेहतरीन
दोस्त हैं, और बहुत ज़हीन आदमी हैं, सभी से अच्छे रिश्ते रखते हैं, खासकर
मीडिया वालों से, कल उन्होंने मुझे जानबूझ कर किनारे वाली सीट पर कर, इसलिए
कि फोटो कटे तो मेरे साथ उनकी फ़ोटो न कट जाए, उनकी ज़हानत काम आई, ऐसा ही
हुआ, एक बार मैंने सोचा उठ कर चला जाऊँ लेकिन जावेद जमील का चेहरा देख कर
रुक गया, अगली सुबह उन्होंने वाज़ेह भी कर दिया था फिर भी उन्होंने रिस्क
लिया, लेकिन अख्तरुल वासे की सोच सही साबित हुई, अगले दिन के अखबार ने ये
वाज़ेह कर दिया, ये पहला मौका नहीं था, साइंस और कुरान की रस्म इजरा के
मौके पर, एडवोकेट वसी अहमद नोमानी को मोहम्मद अली जौहर अवार्ड के मौके पर,
एम सलीम को जमीअत उलेमाए हिंद के मौके पर- गरज़ ये कि अब सवाल सामने आने
लगा है कि अगर अज़ीज़ बर्नी आपके साथ तो कवरेज? जमीअत और मुसलमानों का विजन
डाक्युमेंट की खबर पूरे हिन्दुस्तान में पहले पेज की खबर थी, आज से मैं
अपने आपको तमाम प्रोग्राम की शिरकत से अलग करता हूँ, सिवाय उन छोटे
प्रोग्रामों के जो मीडिया पर मुन्हसिर नहीं हैं, वैसे भी क़लम के बाद आवाज़
को रोकने का कोई रास्ता निकालना ही था, क़ौम तक पहुंचने का रास्ता निकाल
ही लिया जाएगा, सियासत बाखबर तमाम बंदिशों के बाद भी अगर अज़ीज़ बर्नी
ज़िंदा रहा और खुदा की कुदरत उसके साथ रही, न फिरकापरस्त 2014 में हुक्मराँ
होंगे, न मुसलमानों को धोखा देने वाले, तुम जमीन तंग करते जाओ, मैं नई
जमीन तलाश करता जाऊँगा, तुम पुराने साथियों को खरीदते जाओ, मैं नए दोस्त
बनाता जाऊँगा, तुम्हारे पास ताकत है, पैसा है, एक्तेदार है, मेरे पास खुदा
है, दुआ है, हौसला है, फिर भी हार गया तो एक नई तारीख, एक नया हौसला
जगाएगा, ये मज़लूम क़ौम अपना हक औऱ इंसाफ हासिल कर के रहेगी, रात भर का
जागा……………………….
Aziz Burney
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